Friday, May 13, 2022

खुशबू

कितनी भी कोशिश कर लूँ,
कि तुझे आंखों में बसा लूँ..
दिल मे छिपा लूँ..
साँसों में मिला लूँ..
सीने में दबा लूँ,
पर तू एक खुशबू सी है
महकती है,
और उड़ जाती है।

मृत्यु शैया

मृत्यु शैया पर पड़ा हो,
तू जब विदा लेने को हो,
मन में रहेगा क्या तेरे
ये आज ही तू सोच ले।

गर रंज है दिल मे
कि बस एक और मौका चाहिए।
मैं करू वो सब
जो मेरे दिल को करना चाहिए।

तो यही मौका है वो
जिस वक्त को, तू जी रहा।
जी इसे ऐसे 
कि कोई भी गिला फिर ना रहे।
और मौत से फिर मिल
कि यूँ, उससे मिला कोई ना रहे।

दुविधा

दुविधा की घटा
घनघोर छा रही है,
ये अंत है या शुरुआत !
ज़िन्दगी किस ओर जा रही है ?

दर्द

दर्द तुझपे ही नहीं,
मुझपर भी सितम ढाता है ।
टीस उतनी ही है,
जब ' प्यार ' याद आता है।
नीद मुझको भी नहीं, 
हर वक्त खयाल तेरा है।
ये ना सोच कि ' बेपरवाह ' तुझे भूल गया,
मेरी हर सांस में तेरा ही नाम आता है।

जिंदा

हर एक दिन किस तरह जी रहा हूं मैं !
ज़िंदा भी हूं, या बस जिये जा रहा हूं मैं।

Definition of Time

"Time is the 'speed' of change in position of, even the smallest particle of matter, in space"

जिंदगी

"ज़िन्दगी उतनी लंबी नहीं होती जितने साल हम जिंदा रहते है बल्कि उतने समय की होती है जिस समय को हम सच मे जीते हैं।
तो खुद से सवाल करिए कि क्या आज के दिन को आपने जिया, या इसे भी सिर्फ जिंदा रहने कि जद्दोजहद में बिता दिया।"

सच्चाई का आइना

हम खुद को वैसा दिखते हैं
जैसा खुद को देखना हमें अच्छा लगता है, 
और लोगों को हम वैसा दिखते हैं,
जैसा वो हमारे बारे में सोचते हैं, 
तो वो आइना कहां है,
जिसमे हम अपना सच देख सकें?

लेखन

लिखने के लिए एकांत चाहिए, क्युकी एकांत जितना गहराता जाता है कल्पनाशीलता का फैलाव उतना ही बढ़ता जाता है, और हमेशा आप अपने बारे में ही नहीं लिख सकते, वह बोरिंग हो सकता है। अलग लिखने के लिए आप को कोई और होना पड़ेगा पर यदि आप पर लोगो की नजरें हैं तो वो आप को कोई और होने नही देंगी। आप कोई और होने की कोशिश करोगे पर वो आपको यथार्थ में खींच लाएंगी।

यादें

जितना हम अपनें वर्तमान को जीते हैं उससे ज्यादा हम अपनी यादों को जीते हैं। तो रुकिए और पूछिए अपने आप से क्या जो वर्तमान आप जी रहे हैं वो आपकी यादों में जगह बनाने लायक है या नही? सोचिए वो नजदीकी याद जो आपको खुशी देती है, कितने साल पुरानी है... ये कड़वा सच है, की ये वो वक्त है, जो आपने जिया ही नहीं।

दर्द या दवा

तू दर्द है, या दवा है ? मेरी तक़लीफ़ों की ख़ातिमियत है, या वज़ह है !!