Friday, May 13, 2022

पहाड़

वो कुछ नहीं कहते 
पर तुम्हे शब्दों से भर देते हैं
और वो भी कम पड़ते हैं 
तुम्हारे लिए
जिनसे की तुम बता सको
की वो क्या क्या कहते हैं
बिना कुछ कहे।

वो विराट हैं
अनंत हैं
असीमित हैं
जब तुम उनकी गोद में होते हो
तुम्हारा घमंड, अहंकार, आकार
सुक्ष्म हो जाता है ।
तुम्हारा अस्तित्व खो जाता है।

वो मौका देते हैं
तुम्हे फिर से जन्म लेने का
खुद को फिर से बनाने का
विनम्र होने का।

वो दूधिया सफेद से
शांति का प्रतीक हैं,
तो वज्र सा सीना लिए 
फौलाद से कठोर भी।

कभी इंद्रधनुषी रंग में
या स्वर्ण सी चमकार है
तो लालिमा लिए हुए
रक्त से सने से भी।

पुष्प की घाटी समेटे
है कहीं गोदी में वो
और जल जटाओं की तरह
धारण किए दिखता है वो।
तो भूल से भी तुम उसे 
भोला समझ लेना नही।
जीवन दिखाता है तुम्हे
तो मौत भी न भूलने दे
काल सी काली छवि
जब राह में तुमसे मिले।

ये पहाड़ हैं।

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