Friday, May 13, 2022

सैलाब

ये वो आँशू हैं,
जो तू इस धरा के सीने को चीरकर बाहर लाया है।
बेग़ैरत..
और आज तू पूछता है,
कि ये सैलाब क्यों आया है।

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दर्द या दवा

तू दर्द है, या दवा है ? मेरी तक़लीफ़ों की ख़ातिमियत है, या वज़ह है !!