अच्छा चलो कोई बात नही
जा तू खुश रह,
मैं भी कहीं खुश रह लूंगा।
औ बँट ही रही है हमारी ज़िन्दगी तो,
तू चाँद रख, तारे मैं ले लेता हूँ,
शाम तेरी, दिन की धूप मैं ले लेता हूँ।
बगिया के फूल सारे तू रख,
मैं कांटे ले लेता हूँ।
तू दर्द है, या दवा है ? मेरी तक़लीफ़ों की ख़ातिमियत है, या वज़ह है !!
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