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Wednesday, May 13, 2020

डॉ. भीमराव अम्बेडकर - सम्पूर्ण वाङ्मय - खंड 4

यदि व्यक्ति का प्रेम तथा घृणा प्रबल नहीं है तो वह यह आशा नहीं कर सकता कि वह अपने युग पर कोई प्रभाव छोड़ सकेगा और ऐसी सहायता प्रदान कर सकेगा, जो महान सिद्धांतों तथा संघर्ष की अपेक्षा लक्ष्यों के लिए उचित हो। मैं अन्याय, अत्याचार, आडंबर तथा अनर्थ से घृणा करता हूं और मेरी घृणा उन सब लोगों के प्रति है, जो इन्हें अपनाते हैं। वे दोषी है। मैं अपने आलोचकों को यह बताना चाहता हूं कि मैं अपने इन भावों को वास्तविक बल व शक्ति मानता हूं। वे केवल उस प्रेम की अभिव्यक्ति है, जो मैं उन लक्ष्यों व उद्देश्यों के लिए प्रकट करता हूं, जिनके प्रति मेरा विश्वास है।

- भीमराव अम्बेडकर

दर्द या दवा

तू दर्द है, या दवा है ? मेरी तक़लीफ़ों की ख़ातिमियत है, या वज़ह है !!