जितना हम अपनें वर्तमान को जीते हैं उससे ज्यादा हम अपनी यादों को जीते हैं। तो रुकिए और पूछिए अपने आप से क्या जो वर्तमान आप जी रहे हैं वो आपकी यादों में जगह बनाने लायक है या नही? सोचिए वो नजदीकी याद जो आपको खुशी देती है, कितने साल पुरानी है... ये कड़वा सच है, की ये वो वक्त है, जो आपने जिया ही नहीं।
Friday, May 13, 2022
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दर्द या दवा
तू दर्द है, या दवा है ? मेरी तक़लीफ़ों की ख़ातिमियत है, या वज़ह है !!
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वैसे तो मेरा जन्म मुरादाबाद में हुआ पर मेरे जेहन में वहां की कोई याद नहीं बची है, उसके बाद पिताजी का तबादला उत्तर काशी हो गया, वहां भी मै ...
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इंटर करने के १साल बाद जब मैं बी० एस० सी० करने बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी पंहुचा मेरा मन तब भी एक बच्चे का ही था, स्वाभाव से मैं बहोत ही सीध...
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अब सब कुछ सतह पर आ गया है, मेरे प्यार की गहराई को मेरे दिल का सूनापन खा गया है, कभी जो हम... तेरी छुअन, तेरे एहसास, तेरी आँखों...
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