जितना हम अपनें वर्तमान को जीते हैं उससे ज्यादा हम अपनी यादों को जीते हैं। तो रुकिए और पूछिए अपने आप से क्या जो वर्तमान आप जी रहे हैं वो आपकी यादों में जगह बनाने लायक है या नही? सोचिए वो नजदीकी याद जो आपको खुशी देती है, कितने साल पुरानी है... ये कड़वा सच है, की ये वो वक्त है, जो आपने जिया ही नहीं।
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