सूरते-हाल देख
यार ने पूछा,
ये सुर्ख लाल रंग तेरे सीने पे
भला है क्या?
दर्द भूल मेरे होठों पे एक मुस्कान आई,
ना-मूजून (मूर्ख) मैं !
कि तू मासूम इतना !
बात होती
जो पूछता मैं, कि किया क्यों ऐसा ?
नाइंसाफी है ये..
खंज़र भी तेरे हाँथ में..
और सवाल भी तेरा ।
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