Monday, March 28, 2011

स्त्रीत्व

" लेकिन पुरुष में थोड़ी पशुता होती है, जिसे वह इरादा कर के भी हटा नहीं सकता| वही पशुता उसे पुरुष बनाती है| विकास के क्रम में वह स्त्री से पीछे है| जिस दिन वह पूर्ण विकास को पहुँचेगा, वह भी स्त्री हो जायेगा| वात्सल्य, स्नेह, कोमलता, दया, इन्ही आधारों पर यह सृष्टि थमी हुई है और यही स्त्रियों के गुण हैं|अगर स्त्री इतना समझ ले, तो फिर दोनों का जीवन सुखी हो जाये| स्त्री पशु के साथ पशु हो जाती है, तभी दोनों दुखी होते हैं|

..... कर्मभूमि - प्रेमचंद

आस्था

दुखी आशा से इश्वर में भक्ति रखता है, सुखी भय से| दुखी पर जितना ही अधिक दुःख पड़े, उसकी भक्ति बढती जाती है| सुखी पर दुःख पड़ता है, तो वह विद्रोह करने लगता है| वह इश्वर को भी अपने धन के आगे झुकाना चाहता है|

..... कर्मभूमि - प्रेमचंद

Thursday, March 3, 2011

Bhagat Singh quote

चरित्र

कुछ लोग होते हैं
जो इतने कमीने होते हैं
के उनके सामने अगर
उनके ही जैसा एक और आदमी खड़ा कर दिया जाये
तो वो उसे बर्दास्त नहीं कर पाएंगे,
वो खुद अपने आपको बर्दास्त नहीं कर पाएंगे...

.... किसलय

बर्खा

मै सोचता हू...
के इक छत होती
मै होता और तू होती
और साथ में ये बर्खा होती
तू चंचला
तू मनमौजी
बारिस में तू झूमा करती
और पानी कि नन्ही बूंदें
तेरे गलों पर थपकी देतीं |

.... किसलय

गज़ल

मैंने तो यूँ ही तेरे बारे में कोई बात कही थी,
सुनने वालों ने कहा
मिया गज़ल अच्छी कहते हो..

.... किसलय

अलफ़ाज़

इंतज़ार में थे,
बेक़रार थे,
सुनने को जो,
वही अल्फाज़,
आज,
जीने नहीं देते मुझको..

.... किसलय

संतुलन

"दुनिया में हर चीज संतुलित है,
कुछ जगह हमें ये संतुलन दीखता है
और बहुत जगह नहीं "

....किसलय

कल्पनाशीलता

जब आदमी प्रकृति के करीब होता है,
अकेला होता है
तो अधिक कल्पनाशील होता है |

नयी सोच

कोई कुछ नया नहीं सोचता,
लोग सोचते ही नहीं,
वो सोचना ही नहीं चाहते,
और तो और..
वो किसी को सोचने भी नहीं देना चाहते....

.... किसलय

धर्म

हमरे पूर्वज हमसे कहीं जादा बुद्धिमान थे,
उन्होने जीने का एक तरीका बनाया,
जीने का एक सही ढंग,
उसे कहा " धर्म "
और लोगो से कहा वो इसके अनुसार चलें
तो उनका जीवन बेहतर हो सकेगा,
फिर समय बदलता गया...
चीजें बदलती गईं
लोगो का मिजाज बदलता गयानहीं बदला तो "धर्म", वो तरीका,
वो उन्ही तरीकों से जीने कि कोशिश कर रहे हैं....

हर जगह पानी ही पानी था
लोग उसमे तैरते रहते थे, हाँथ पांव मरते रहते,
थके हारे...
फिर उनमे से कुछ बुद्धजीवियों ने सोचा...
उन्होने एक नाव बनायी,
और लोगो को उसमे बिठा दिया,
लोगो को बहोत अच्छा लगा
अब वो आराम से चप्पू चलते और नाव में तैर करते थे...

अब पानी बहुत कुछ सूख चूका है
वहां कीचड़ है,
लेकिन लोग..
नव में बैठे हुए हैं
चप्पू चला रहे हैं
उस कीचड़ में..

कुछ दिनों में ये कीचड़ भी सूख जायेगा,
नाव इंच भर भी न हिलेगी
मै समझता हूँ
तब लोग इसे उठा कर सर पर रख लेंगे
और घुटनों क बल उस सख्त जमीं पर
तैरने कि कोशिश करेंगे....
..... डा. किसलय


Dale Carnegie

स्मरण रहे कि जिस व्यक्ति से आप बात कर रहे हैं वह जितना आप में और आपकी समस्याओं में दिलचस्पी रखता है, उससे सकड़ों गुना अधिक अपने में, अपने प्रियजनों और अपनी समस्याओं में रखता है |

Dale Carnegie

"आत्म-विश्वास बढ़ाने की रीती यह है कि तुम वह काम करो जिसे करते तुम डरते हो"

ओशो

अकेले चलने में कोई अड़चन नहीं,
सवाल ही वहां उठते हैं,
जहाँ चार आदमी को साथ लेकर चलना हो,
तो कभी अपनी गति कम भी करनी पड़ती है,
कभी अपनी गति जादा भी करनी पड़ती है |

" ओशो "

ओशो

"लोग सोचते ही कहाँ हैं;
लोग तो चबा-चबाया गटक जाते हैं;
चबाते भी नहीं "

ओशो

मनुष्य की सबसे बड़ी समस्या है ऊब,
बोरडम है,
क्यों?
इसीलिए मनुष्य की सबसे बड़ी समस्या ऊब है,
की जो जान लिया,
उससे ही ऊब पैदा हो जाती है.

Monday, February 28, 2011

बेवफा

अब सब कुछ सतह पर आ गया है,
मेरे प्यार की गहराई को
मेरे दिल का सूनापन खा गया है,
कभी जो हम...
तेरी छुअन,
तेरे एहसास,
तेरी आँखों की गहराई में डूबे रहते थे बेवफा,
अब हमें भी तैरना आ गया है.

दर्द या दवा

तू दर्द है, या दवा है ? मेरी तक़लीफ़ों की ख़ातिमियत है, या वज़ह है !!