स्मरण रहे कि जिस व्यक्ति से आप बात कर रहे हैं वह जितना आप में और आपकी समस्याओं में दिलचस्पी रखता है, उससे सकड़ों गुना अधिक अपने में, अपने प्रियजनों और अपनी समस्याओं में रखता है |
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दर्द या दवा
तू दर्द है, या दवा है ? मेरी तक़लीफ़ों की ख़ातिमियत है, या वज़ह है !!
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वैसे तो मेरा जन्म मुरादाबाद में हुआ पर मेरे जेहन में वहां की कोई याद नहीं बची है, उसके बाद पिताजी का तबादला उत्तर काशी हो गया, वहां भी मै ...
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इंटर करने के १साल बाद जब मैं बी० एस० सी० करने बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी पंहुचा मेरा मन तब भी एक बच्चे का ही था, स्वाभाव से मैं बहोत ही सीध...
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अब सब कुछ सतह पर आ गया है, मेरे प्यार की गहराई को मेरे दिल का सूनापन खा गया है, कभी जो हम... तेरी छुअन, तेरे एहसास, तेरी आँखों...
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