Wednesday, June 3, 2020
Inspired thought
परमात्मा ने दो धर्म बनाए जिनमें एक लिखित है। यह लिखित धर्म उसमे आस्था रखने वाले लोगों के पथ प्रदर्शन के लिए है, जो उसके उपदेशों का पालन करके उनके चित्रित किए स्वर्ग में जाएंगे दूसरा धर्म हमारे हाथों में है हमारा यह धर्म आकाश, चट्टानों, नदियों और पर्वतों में है। और हम लोग जो उसे प्राकृति में देखते हैं उसकी वाणी को सुनते हैं और अंततः उसे स्वर्ग के उस पार जाकर खोज लेते हैं।
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दर्द या दवा
तू दर्द है, या दवा है ? मेरी तक़लीफ़ों की ख़ातिमियत है, या वज़ह है !!
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वैसे तो मेरा जन्म मुरादाबाद में हुआ पर मेरे जेहन में वहां की कोई याद नहीं बची है, उसके बाद पिताजी का तबादला उत्तर काशी हो गया, वहां भी मै ...
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तू दर्द है, या दवा है ? मेरी तक़लीफ़ों की ख़ातिमियत है, या वज़ह है !!
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गर ज़ी रहे हो ज़िन्दादिली से.. तो पल में ज़िन्दगी जी सकते हो.. वर्ना, पसमर्दगी में तो अहसास ही नही होता कि साल कब गुज़र गए।
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