Sunday, May 24, 2020
डॉ. भीमराव अम्बेडकर - सम्पूर्ण वाङ्मय - खंड 10
यह निर्विवाद है कि धार्मिक मान्यता से अधिक शक्तिशाली कोई और मान्यता नहीं हो सकती, जिसे कोई संस्था या आस्था अपने अस्तित्व को बनाए रखने और उसे पुष्ट करने के लिए अर्जित कर सकती है। उसकी शक्ति अनंत है और उसका शिकंजा फौलादी है। लेकिन यह बात कम ही समझ में आती है कि इस धार्मिक मान्यता को इतनी बढ़िया किस्म की अश्व-शक्ति कैसे और कहां से प्राप्त होती है?
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
दर्द या दवा
तू दर्द है, या दवा है ? मेरी तक़लीफ़ों की ख़ातिमियत है, या वज़ह है !!
-
तू दर्द है, या दवा है ? मेरी तक़लीफ़ों की ख़ातिमियत है, या वज़ह है !!
-
वो कुछ नहीं कहते पर तुम्हे शब्दों से भर देते हैं और वो भी कम पड़ते हैं तुम्हारे लिए जिनसे की तुम बता सको की वो क्या क्या कहते हैं बिना कुछ...
-
इंटर करने के १साल बाद जब मैं बी० एस० सी० करने बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी पंहुचा मेरा मन तब भी एक बच्चे का ही था, स्वाभाव से मैं बहोत ही सीध...
No comments:
Post a Comment