"अपने अनुभवों की भली बुरी बहुत सी स्मृतियां कभी कभी उसे याद आ जाती हैं । परंतु वो सब मानो पुस्तक में पढ़ी हुई कल्पित कहानियों की तरह अवास्तविक मालूम होती हैं ।"
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दर्द या दवा
तू दर्द है, या दवा है ? मेरी तक़लीफ़ों की ख़ातिमियत है, या वज़ह है !!
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वैसे तो मेरा जन्म मुरादाबाद में हुआ पर मेरे जेहन में वहां की कोई याद नहीं बची है, उसके बाद पिताजी का तबादला उत्तर काशी हो गया, वहां भी मै ...
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तू दर्द है, या दवा है ? मेरी तक़लीफ़ों की ख़ातिमियत है, या वज़ह है !!
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गर ज़ी रहे हो ज़िन्दादिली से.. तो पल में ज़िन्दगी जी सकते हो.. वर्ना, पसमर्दगी में तो अहसास ही नही होता कि साल कब गुज़र गए।
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