"अपने अनुभवों की भली बुरी बहुत सी स्मृतियां कभी कभी उसे याद आ जाती हैं । परंतु वो सब मानो पुस्तक में पढ़ी हुई कल्पित कहानियों की तरह अवास्तविक मालूम होती हैं ।"
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दर्द या दवा
तू दर्द है, या दवा है ? मेरी तक़लीफ़ों की ख़ातिमियत है, या वज़ह है !!
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इंटर करने के १साल बाद जब मैं बी० एस० सी० करने बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी पंहुचा मेरा मन तब भी एक बच्चे का ही था, स्वाभाव से मैं बहोत ही सीध...
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वैसे तो मेरा जन्म मुरादाबाद में हुआ पर मेरे जेहन में वहां की कोई याद नहीं बची है, उसके बाद पिताजी का तबादला उत्तर काशी हो गया, वहां भी मै ...
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