खटीमा - पिथौरागढ़ - खटीमा {06 & 07.07.2010} . . . . .
खटीमा से पिथौरागढ़ की यात्रा में रोमांच थोड़ा कम है पर खूबसूरत नज़ारे बहुत हैं, असल में हुआ यूँ की खटीमा में सुहैल के मित्र के घर वालो को जब ये पता चला की ये सारी यात्रा हम लोग बाइक पर करने निकले हैं तो वे काफी डर गए और हमें भी खूब डराया की बाइक से जाना सुरक्षित नहीं है, सड़क ख़राब होती है, लड़ जाओगे, पहाड़ से गिर जाओगे, जाने क्या क्या ..... अब घर के बड़े बुजुर्गो ने राय दी और हमें भी बाइक से पहाड़ो की यात्रा का कोई पूर्व अनुभव नहीं था, तो मैंने और सुहैल ने तय किया की पिथौरागढ़ हम लोग बस से जायेंगे और ये देखेंगे कि पहाड़ी सड़कें कैसी होती है और क्या हम उनपर बाइक चला पाएंगे |
पिथौरागढ़ के लिए बस टनकपुर से मिलती है (सैनिक आरामगढ़ बस स्टेशन) हम एक जीप में बैठ कर बस स्टेशन पहुचे, बस पकड़ी और चल दिए पिथौरागढ़ क रास्ते पर |
रास्ता शुरु से ही खूबसूरत है नदियों और जंगलो को
पार कर हम पहाड़ी रास्ते पर पहुच गए और उन रास्तो पर पहुचते ही हम दोनों को अफ़सोस
होना शुरू हो गया, क्युकी जो जानकारी हमें दि गई थी वो बिलकुल गलत थी | वहा की
सड़के इतनी अच्छी स्थिति में थी जो की अक्सर हमें प्लेन एरिया में भी देखने को नहीं
मिलती और लोग उस पर बाइक क्या स्कूटर से भी चल रहे थे | अब हमें अफ़सोस होने लगा की इतनी अच्छी सड़क पर बाइक राइडिंग मिस कर दी | इस बस
यात्रा में एक बार सुहैल को हल्का बुखार हुआ और एक बार मुझे, शायद
मौसम में परिवर्तन की वजह से पर कोई परेशानी नहीं हुई क्युकी हमारे पास दवायें और
कम्बल था |

ऊपर तस्वीरो में आप अच्छी सड़क और स्कूटर देख सकते हैं |
पितौरागढ़ पहुचते पहुचते अँधेरा हो चला था तो हमने एक होटल लिया और फ्रेश हो कर खाने की तलाश में निकले, हमारा बजट कम था तो कोशिश यही होती थी की बजट में ही कही अच्छा खाना मिल जाए और पास ही हमें एक रेस्टोरेंट मिला जहा हमने दाल फ्राई और रोटी खाई और वो मेरी तब तक की खाई सबसे बढ़िया दाल फ्राई, थी उसमे डाले घी की खुशबू बिलकुल फ्रेश और देसी थी, वाह ! पहाड़ों और गाँवों की ये खासियत है की आपको वहा शुद्ध खाने को मिलता है बशर्ते वो आज की अधाधुंध फैलती आधुनिकता, भीड़ और प्रदुषण से थोड़े दूर हों .
सुबह हमें पिथौरागढ़ की असल ख़ूबसूरती दिखाई दी, पूरा शहर एक घटी में बसा है जिसके चारो तरफ ऊँचे पहाड़ हैं हम ऐसे ही एक पहाड़ पर बने होटल में रुके हुए थे जहा से नज़ारा और भी सुन्दर दिख रहा था |
१- पिथौरागढ़ शहर का नज़ारा
२- दुर्गा होटल जहाँ हमने खाना खाया
३- सम्राट होटल जहाँ हम रुके थे
शेष -टैक्सी स्टैंड, रस्ते में मिला एक घंटी वाला मंदिर, नज़ारे और वापसी में खटीमा जाते उए एक ऑटो में |
इस सफ़र में बाइक राइड का रोमांच तो हमने मिस कर दिया पर हमें एक्स्पीरिएंस और कॉन्फिडेंस मिला की हम पहाड़ो पर भी बाइक राइड कर सकते हैं | हम वापस खटीमा में अपने होटल में आ गए और आगे के सफ़र की प्लानिंग करने लगे जिसका पहला डेस्टिनेशन था बिजनौर, हमने काशीपुर से गुजरने वाला रास्ता तय किया जिससे बिजनौर करीब 223 km पड़ता है और ये रास्ता पहाड़ो से सटकर चलता है तो हमने सोचा की इस रास्ते पर खुबसूरत नज़ारे भी देखने को मिलेंगे |

आगे चौथे दिन की कहानी अगली पोस्ट में, क्युकी यात्रा अभी जारी है . . . .


